रौशनी -ए -चिराग
रौशनी -ए -महफ़िल ,तू उदास क्यूँ है ?
जिंदगी की दुश्वारियों से हताश क्यूँ है ?
न जाने कितनी जिंदगियों का है तू नूर ,
फिर बेबस और लाचार क्यूँ है ?
जिसकी बातें है ,तिलिस्म -ए -चिराग ,
फिर अभी तेरे दिल में अंधकार क्यूँ है ?
चिराग को घिस और रौशनी जला ,
यही कर देगा ,तेरा रौशन जहाँ।
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